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बिहार राज्यसभा चुनाव: चार सीटें एनडीए की पक्की, पांचवीं पर सस्पेंस—उपेंद्र कुशवाहा की दावेदारी सबसे मजबूत

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पटना: बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। पांच सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही सत्ताधारी एनडीए और उसके सहयोगी दलों के बीच अंदरूनी समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। चुनाव आयोग की अधिसूचना के अनुसार 26 फरवरी से नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि मतदान और मतगणना 16 मार्च को एक साथ संपन्न होगी। मौजूदा संख्या बल के आधार पर एनडीए की चार सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन पांचवीं सीट को लेकर अब भी रणनीतिक सस्पेंस बना हुआ है। एनडीए खेमे में तय फार्मूले के अनुसार भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) दो-दो उम्मीदवार मैदान में उतारेंगे। इससे गठबंधन की चार सीटें सुरक्षित मानी जा रही हैं, जबकि पांचवीं सीट सहयोगी दल को दिए जाने की संभावना है। इसी सीट को लेकर राजनीतिक अटकलें सबसे ज्यादा तेज हैं। शुरुआत में इस सीट के लिए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की मां रीना पासवान का नाम चर्चा में था, लेकिन बाद में इसे पूरी तरह खारिज कर दिया गया। चिराग पासवान ने स्पष्ट कहा कि उनकी मां सक्रिय राजनीति में आने की इच्छुक नहीं हैं और उनकी पार्टी राज्यसभा की सीट के लिए दावा भी नहीं कर रही है। इसके बाद गठबंधन की नजरें अब उपेंद्र कुशवाहा पर टिक गई हैं। माना जा रहा है कि पांचवीं सीट के लिए उनका दावा सबसे मजबूत बनकर उभरा है, हालांकि इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इससे पहले इस सीट को लेकर जीतन राम मांझी का नाम भी सामने आया था, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने उस संभावना को आगे नहीं बढ़ाया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पांचवीं सीट का फैसला सिर्फ उम्मीदवार तय करने का मामला नहीं बल्कि एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति से भी जुड़ा है। यही वजह है कि अंतिम नाम की घोषणा से पहले गठबंधन के शीर्ष नेताओं के बीच लगातार मंथन जारी है। फिलहाल बिहार की राजनीतिक नजरें उसी एक सीट पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में एनडीए के भीतर समीकरण और सहयोगियों की ताकत का संकेत देने वाली साबित हो सकती है।

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